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गणेश चतुर्थी पर भोग के अनोखे प्रसाद: जानें भगवान गणेश को क्या अर्पित किया जाता है?

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गणेश चतुर्थी भोग प्रसाद

Ganesh Chaturthi Bhog Prasad (Photo - Social Media) 

Ganesh Chaturthi Bhog Prasad

गणेश चतुर्थी भोग प्रसाद: भारत त्योहारों का देश है, जहां हर पर्व विशेष रीति-रिवाज़ और परंपराओं के साथ मनाया जाता है। गणेश चतुर्थी एक प्रमुख और लोकप्रिय त्योहार है, जिसमें 10 दिनों तक गणपति बप्पा की स्थापना से लेकर विसर्जन तक पूजा, भजन-कीर्तन और सांस्कृतिक कार्यक्रम होते हैं। इस पर्व की खासियत भोग और प्रसाद की परंपरा है। भगवान गणेश को मोदक प्रिय माना जाता है, लेकिन इसके अलावा तिल के लड्डू, खीर, सूखे मेवे, फलों का रस, पान और सुपारी जैसे कई पारंपरिक भोग भी अर्पित किए जाते हैं।


मोदक - गणेश जी का प्रिय भोग

भगवान गणेश का सबसे प्रिय भोग मोदक है, जिसे विशेष रूप से महाराष्ट्र और दक्षिण भारत में श्रद्धा से बनाया जाता है। इसका आकार छोटे डोंगे जैसा होता है, जिसमें नारियल, गुड़ और सूखे मेवों की मीठी भराई होती है। धार्मिक ग्रंथों में मोदक को गणेशजी का प्रिय प्रसाद बताया गया है। मोदक के कई प्रकार होते हैं, जैसे उकडीचे मोदक, तले हुए मोदक, चॉकलेट मोदक और अन्य आधुनिक वैरायटी। उकडीचे मोदक सबसे पारंपरिक माने जाते हैं, जिन्हें चावल के आटे से बनाकर भाप में पकाया जाता है। मान्यता है कि गणेशजी को मोदक अर्पित करने से भक्त की सभी इच्छाएँ पूर्ण होती हैं।


पुए और पुरी

उत्तर भारत में गणेशोत्सव के दौरान गेहूँ के आटे और गुड़ से बने पुए और पुरी भगवान गणेश को भोग स्वरूप अर्पित किए जाते हैं। ये व्यंजन स्वादिष्ट होने के साथ-साथ स्वास्थ्य के लिए भी लाभकारी माने जाते हैं। पूजा के बाद इन प्रसादों को परिवार और आस-पड़ोस के लोगों में बाँटने की परंपरा है, जो सामूहिक खुशी और भक्ति की भावना को प्रकट करती है।


लड्डू - तिल और बेसन के खास स्वाद

गणपति बप्पा के प्रिय भोगों में लड्डू का विशेष स्थान है। गणेश चतुर्थी पर भक्तजन बेसन के लड्डू, बूंदी के लड्डू, मोतीचूर के लड्डू और तिल-गुड़ के लड्डू बनाकर अर्पित करते हैं। धार्मिक मान्यता के अनुसार, लड्डू समृद्धि और मिठास का प्रतीक माने जाते हैं।


नारियल भोग

गणेश चतुर्थी पर नारियल अर्पित करना शुभ माना जाता है। पूजा की शुरुआत में भगवान गणेश को नारियल चढ़ाया जाता है। दक्षिण भारत में नारियल से बने हलवे और बर्फी भी अर्पित किए जाते हैं।


पूरन पोली

महाराष्ट्र में गणेश चतुर्थी पर पूरन पोली बनाने की परंपरा है। यह मीठी रोटी चने की दाल, गुड़ और इलायची की भराई से तैयार की जाती है।


अप्पे या पनियारम

दक्षिण भारत में गणेश चतुर्थी के अवसर पर अप्पे या पनियारम को भगवान गणेश को अर्पित किया जाता है। यह पारंपरिक व्यंजन चावल और उड़द दाल के घोल से तैयार किया जाता है।


खीर और पायसम

भारतीय परंपरा में खीर हर पूजा का अभिन्न हिस्सा है। गणेश चतुर्थी पर खीर का विशेष महत्व होता है।


सेवई और हलवा

गणेश चतुर्थी पर सेवई की खीर और सूजी का हलवा प्रसाद के रूप में बनाने की परंपरा है।


पंचमेवा प्रसाद

गणेश चतुर्थी पर पंचमेवा अर्पित करने की परंपरा प्रचलित है, जिसमें बादाम, काजू, किशमिश, अखरोट और पिस्ता शामिल होते हैं।


फलाहार - मौसमी फल और आस्था

गणपति बप्पा को मौसमी फलों का भोग अर्पित करने की परंपरा भी महत्वपूर्ण है। इनमें अनार, केला, अमरूद, सीताफल और सेव जैसे फल प्रमुख हैं।


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